अलाउद्दीन खिलजी के प्रशासनिक सुधार

अलाउद्दीन खिलजी के प्रशासनिक सुधार

अल्लाउद्दीन खिलजी प्रशासनिक क्षेत्र का महान सेनानी था। इससे पूर्व किसी मुसलमान शासक ने राज्य के विषयों का ऐसा प्रबंध नहीं किया था वह प्रशासन के केंद्रीकरण में पूर्ण विश्वास रखता था। वह अपने को धरती पर ईश्वर का नायक मानता था। खलीफा होने का दावा करता था। उसने अपने को हमेशा उलेमा के आदेशों से अलग रखा।
अलाउद्दीन खिलजी के प्रशासनिक सुधार
प्रशासनिक सुधार

अल्लाउद्दीन खिलजी के प्रशासनिक सुधार के महत्वपूर्ण भाग

दीवानअजारत:- यह मुख्यमंत्री होता था इसे वजीर भी कहा जाता था। अल्लाउद्दीन खिलजी अपने सिंहासनारोहण के समय ख्वाजा खातिर को अपना वजीर बनाया तथा बाद में उसके स्थान पर ताजुद्दीन काफी को वजीर बनाया इसके समय वजीर सबसे महत्वपूर्ण पद होता था। यह वित्त विभाग को देखता था। साथ ही सैनिक अभियान के समय शाही सेनाओं का भी नेतृत्व करता था।

दीवानआरीज:- यह एक वजीर पद था हुष्पामहत्वपूर्ण अधिकारी दीवान-ए-आरीज था इसका कार्य सेना की भर्ती करना वेतन बाँटना साज-सज्जा और दक्षता की देखरेख करना था। सेना का निरीक्षण करना और युद्ध के समय सेनापति के साथ जाना इसका कर्तव्य था। 
नासीरूद्दीन मुल्क सिराजुद्दीन आरीज-ए-मुमारिक था। और उसका उत्तराधिकारी ख्वाजा हाकी नायब आजी था। आरिफ अपने सैनिकों के प्रति सहानुभूति का व्यवहार करता था। अलाउद्दीन खिलजी ने सैनिकों के प्रति सहृदयता की नीति अपनाई थी।

दीवान-ए-इंशा:- यह राज्य का तीसरा महत्वपूर्ण मंत्रालय होता था, जिसका प्रधान वरीद-ए-मूबालीकथा। इसका कार्य शाही आदेशों और पत्रों का प्रारूप बनाना प्रांतपति और अस्थाई अधिकारी से पत्र व्यवहार करना था। और सरकारी बातों का ब्यौरा रखना था, इसके पास अनेक सचिव होते थे जिन्हें दबीर कहा जाता था। दबीर के प्रमुख को दबीर-ए-मुमलीकातकहा जाता था।

दीवान-ए-रसातल:- यह राज्य का चौथा महत्वपूर्ण मंत्री होता था इसका मुख्य कार्य पड़ोसी दरबारों को भेजे जाने वाले पत्रों का प्रारूपतैयार करना था। और विदेश जाने तथा विदेश से आने वाले राजदूतों के साथ संपर्क करना था। इस विभाग को सुल्तान स्वयं देखता था

दीवान-ए-रियासत:- अलाउद्दीन ने प्रशासनिक सुधार के तहत एक नया मंत्रालय खोला जिसके अंतर्गत राजधानी के आर्थिक मामले थे। यह बाजार की संपूर्ण व्यवस्था का संघीय मंत्री या उत्तराधिकारी होता था। यायीब को इस पद पर नियुक्त किया गया था।
इनके अतिरिक्त राजमहल के कार्यों का देख-रेख वकील-ए-दर करता था, अमीर-ए-दर उत्सव अधिकारी होता था, शारजहाँरा  सुल्तान के अंगरक्षकों का नायक होता था सहना-ए-पिस गजाध्यक्ष होता था, गुरदार शाही अंगरक्षक होता था।

अल्लाउद्दीन खिलजी के समय न्याय प्रशासन:-

अल्लाउद्दीन खिलजी के समय न्याय प्रशासन
अल्लाउद्दीन खिलजी के समय न्याय प्रशासन

सुल्तान न्याय का श्रोता तथा अपील का उच्चतम अदालत होता था। सुल्तान के बाद सद्र-ए-जहाँ या काजी-उल-कजात होता था। इनके नीचे नायब काजी या अदलकारी कार्य करते थे, और उनकी सहायता के लिए मुक्ति होते थे।
एक अन्य अधिकारी दरबार में प्रस्तुत होता था, जिस पर काजियों का नियंत्रण नहीं होता था। गांव में मुखिया झगड़ों का निपटारा करते थे।

अलाउद्दीन खिलजी के समय पुलिस व गुप्तचर व्यवस्था:-

अलाउद्दीन खिलजी ने अपने शासनकाल में पुलिस एवं गुप्तचर विभाग को प्रभावी बनाया कोतवालपुलिस विभाग का प्रमुख अधिकारी होता था। इस विभाग को और अधिक सुधारने के लिए अलाउद्दीन खिलजी ने एक नए पद दीवान-ए-रियासतका गठन किया जो व्यापारिक वर्ग पर नियंत्रण रखता था।
सहना या दंडाधिकारी भी इसी प्रकार के अधिकारी थे, मुहतसीप जनसाधारण के आचार का रक्षक तथा देखभाल करने वाला होता था। वह बाजारों पर भी नियंत्रण रखता था, एवं नापतोल का निरीक्षणकरता था।
अल्लाउद्दीन खिलजी ने गुप्तचर विभाग को भी संगठित किया इस विभाग के मुख्य अधिकारी वरीद-ए- मुमालिक होता था। इसके अंतर्गत अनेक वरिद थे जो राज्य में घटने वाली प्रत्येक घटना की सूचना सुल्तान को देते थे। वरीद के अतिरिक्त सुल्तान ने अनेक सूचना दाता नियुक्त किए थे जो मुन्ही कहलाते थे।

अलाउद्दीन खिलजी के समय वित्तीय एवं कर पद्धति

अलाउद्दीन खिलजी के समय वित्तीय एवं कर पद्धति
अलाउद्दीन खिलजी के समय वित्तीय एवं कर पद्धति

अल्लाउद्दीन खिलजी पहला सुल्तान था जिसने वित्तीय और राजस्व व्यवस्था को सुधारने में गहरी दिलचस्पी ली। भूमि कर के संबंध में मुस्तखराजनामक एक नए पदाधिकारी की नियुक्ति की। जो किसानों से ना दिए गए करो को वसूलता था। उसके समय भूमि कर 50% थी।
अल्लाउद्दीन खिलजी प्रथम सुल्तान था जिसने भूमि की वास्तविक आय पर राजस्व निश्चितकी। भूराजस्व के अलावा सुल्तान ने आवास कर तथा चराईकर भी लगाया। अल्लाउद्दीन के कर सफलता का श्रेय उसके नायब वजीर सर्फ कायिनी को जाता है।

अलाउद्दीन खिलजी के समय आर्थिक सुधार

अलाउद्दीन खिलजी के समय आर्थिक सुधार
अलाउद्दीन खिलजी के समय आर्थिक सुधार

अलाउद्दीन को साम्राज्य विस्तार की महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए एवं मंगोल आक्रमण के कारण एक विशाल सेना की आवश्यकता थी। और इन विशाल सेना की समुचित खर्च के लिए इसने नई आर्थिक नीति लागू की इसके आर्थिक नीति के विषय में हमें व्यापक जानकारी जियाउद्दीन बरनी की कृति तारीख-ए-फिरोजशाहीसे मिलती है।
तथा आर्थिक सुधारों के तहत मूल्य नियंत्रण के विषय में जानकारी अमीर खुसरोकी पुस्तक खजामी-उल-फुतुह से प्राप्त होती है। इसने वस्तुओं के भाव निश्चित कर दिये थे, और मूल्यों की यही स्थिरता अलाउद्दीन की महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।
अल्लाउद्दीन ने खाद्यान्नों की बिक्री हेतु शाहना-ए-मंडी नामक बाजार की व्यवस्था की, साथ ही इसने प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए शासकीय अन्य भंडारों की भी व्यवस्था की राशनींग व्यवस्था अल्लाउद्दीन की नई सोच थी।
अल्लाउद्दीन ने सराय-ए-अदल नामक ऐसी बाजार बाजार की व्यवस्था की थी जहां पर वस्त्र, शक्कर, जड़ी-बूटी एवं जलाने वाला तेल आदि बिकता था।

अलाउद्दीन खिलजी के समय स्थापत्य कला

सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने अनेक निर्माण कार्य शुद्ध इस्लामिक पद्धति के अंतर्गत करवाया। इसने सिरी नामक एक गांव में एक नगर की स्थापना की। बरनी ने इसे नवनगर कहा है।
इस नगर के बाहर उसने हौज-ए-खास तालाब का निर्माण करवाया अमीर खुसरो ने इसकी प्रशंसा में लिखा है कि पानी के बीच गुंबद समुद्र की सतह पर बुलबुले के समान है।
अलाई दरवाजा 1311 ई०
अलाई दरवाजा 1311 ई०

अलाउद्दीन खिलजी ने 1311 ई० में अलाई दरवाजाका निर्माण करवाया जो कुब्बत-उल-इस्लाम मस्जिद के दक्षिण भाग में स्थित है। इसके विषय में सर जॉन मार्शल ने कहा है, कि अलाई दरवाजा इस्लामिक वास्तुकला की अमूल्य निधि है।
जमात खाना मस्जिद
जमात खाना मस्जिद

जमात खाना मस्जिद इसका निर्माण अलाउद्दीन खिलजी ने निजामुद्दीन औलिया की दरगाह के समीप कराया यह भारत में ऐसी मस्जिद का सबसे पुराना उदाहरण है, जो पूर्णतः इस्लामिक विचारों के अनुसार बनी है।

अलाउद्दीन का सैनिक शासन:-

अलाउद्दीन का सैनिक शासन
अलाउद्दीन का सैनिक शासन

अलाउद्दीन ने घोड़े को दागने तथा सैनिकों की होलिया दर्ज करने के नियम बनाये तथा वह पहला सुल्तान था जिसने विशाल स्थाई सेना रखी।
उसने सैनिकों को नगद वेतन देने की योजना बनाई तथा उसे प्रचलन में लाया और वृद्ध सैनिकों को सेवानिवृत्त कर उन्हें पेंशन दी।
अमीर खुसरो के अनुसार 10,000 सैनिकों की टुकड़ी को तूमन कहा जाता था। भली-भांति जाँच परख कर भर्ती किए गए सैनिकों को मुर्तब कहा जाता था।

कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी ( 1316 – 1320 ई० )

कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी ( 1316 - 1320 ई० )
कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी 

यह 14 अप्रैल 1316 ई० को गद्दी पर बैठा इसने कठोर अल्लाई  नियमों को हटा दिया। इसके शासनकाल में सर्वाधिक उन्नति गुजरात के शासक दास हसन ने की जिसे सुल्तान ने खुसरो खाँ की उपाधि प्रदान की। मुबारक खिलजी को नग्न स्त्रियों की संगत पसंद थी
तथा वह कभी-कभी राजदरबार में स्त्रियों के वेश में आ जाता था। इतिहासकार बरनी कहता है कि वह कभी-कभी नग्न होकर दरबारियों के बीच दौड़ता था। इसने स्वयं को खलीफा घोषित किया 15 अप्रैल 1320 ई० को इसकी हत्या इसके वजीर खुसरोशाह ने की।
मुबारक खिलजी ने भरतपुर में उर्वा मस्जिद का भी निर्माण करवाया।

नसीरुद्दीन खुसरो शाह:-

यह हिंदू धर्म से परिवर्तित मुसलमान था इसने हिन्दू प्रभुत्व की स्थापना करनी चाहि, साथ ही इसने पैगंबर के सेनापति की उपाधि धारण की। लेकिन बाद में 5 सितंबर 1320 ई० को गाजी मलिक तुगलक ने इसकी हत्या कर एक नए राजवंश तुगलक वंश की स्थापना की।


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