सिंधु घाटी सभ्यता का इतिहास| HISTORY OF INDUS VALLEY CIVILIZATION

सिंधु घाटी सभ्यता का इतिहास| HISTORY OF INDUS VALLEY CIVILIZATION


सिंधु घाटी सभ्यता का भारतीय इतिहास में विशेष स्थान है क्योंकि इस सभ्यता के प्रकाश में आने से भारतीय इतिहास में मौर्य काल से पूर्व की विस्तृत जानकारी प्राप्त होती है सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में (मिस्र, मेसोपोटामिया, सुमेर एवं क्रीट) के समान विकसित एवं प्राचीन सभ्यता थी
सर्वप्रथम 1922 में रायबहादुर दयाराम साहनी ने हड़प्पा (जिला मोंटगोमरी, पाकिस्तान) नामक स्थान पर इस महत्वपूर्ण सभ्यता के अवशेषों का पता लगाया प्रारंभ में उत्खनन कार्य सिंधु नदीघाटी में ही किया गया था वहीं इस सभ्यता के अवशेष सर्वप्रथम प्राप्त हुए थे अतः इस सभ्यता को सिंधु घाटी सभ्यता कहा गया
किंतु कालांतर में इस सभ्यता के अवशेष सिंधु नदी की घाटी से दूर गंगा-यमुना के दोआब और नर्मदा-ताप्ती के मुहाना तक प्राप्त हुए हैं अतः कालांतर में पुरातत्ववेत्ताओं ने पुरातत्व परंपरा के आधार पर इस सभ्यता का नाम उसके सर्वप्रथम ज्ञात स्थल के नाम पर हड़प्पा सभ्यता दिया
हड़प्पा के टीले का सर्वप्रथम उल्लेख 1826 में चार्ल्स मेसन ने किया तत्पश्चात जनरल बनिंघम ने 1857 तथा 1873 में इसका सर्वेक्षण किया लेकिन इस सभ्यता की खोज का श्रेय रायबहादुर दयाराम साहनी को जाता है इसकी खोज 1922 में की गई
मोहनजोदड़ो इसका अर्थ होता है मृतकों का टीला इसकी खोज सर्वप्रथम 1922 में रखालदास बनर्जी ने किया था उसके पश्चात 1931 में एन.जी. मजूमदार ने मोहनजोदड़ो से 128 किलोमीटर दूर चन्हूदड़ो का उत्खनन करवाया

सिंधु घाटी सभ्यता का इतिहास| HISTORY OF INDUS VALLEY CIVILIZATION


सिंधु घाटी सभ्यता का इतिहास| HISTORY OF INDUS VALLEY CIVILIZATION 


सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल एवं उनके खोजकर्ता
·        हड़प्पा – दयाराम साहनी
·        मोहनजोदड़ो – रखाल दास बनर्जी
·        सुत्कागेंडोर – औरल इनस्टाइन
·        चान्हूदड़ो – एनजी मजूमदार
·        रंगपुर – माधव स्वरूप वस्त
·        रोपड़ – यज्ञदत्त शर्मा
·        कालीबंगा – विवि लाल व अमलानंद घोष
·        कोटदीजी – अफजल अहमद खान
·        लोथल – एस.आर. राव
·        सुरकोटदा – जगपति जोशी
·        मीताथल – सुर भजन्य
·        बणवाली – आर.एस. वीस्ट
·        धौलावीर – आर.एस. वीस्ट
·        राखीगढ़ी – सूरजमान

सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल एवं जहां स्थित है।

सिंधु घाटी सभ्यता स्थल
जहां स्थित
हड़प्पा
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मोंटगोमरी जिला में
मोहनजोदड़ो
पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लरकाना जिला में
सुत्कागेंडोर
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में
चन्हूदड़ों
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में
रंगपुर
गुजरात राज्य के अहमदाबाद में
रोपड़
पंजाब राज्य में
कालीबंगा
राजस्थान के गंगानगर जिला में
कोटदीजी
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में
लोथल
गुजरात राज्य के अहमदाबाद जिला में
आलमगीरपुर
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिला में
सूरकोटदा
गुजरात राज्य के कच्छ जिला में
मिताथल
हरियाणा के भवानी जिला में
बनवाली
हरियाणा राज्य के हिनसार जिला में
धौलावीर
गुजरात के कच्छ में
गनवेरीलाल
पाकिस्तान में
राखीगढ़ी
हरियाणा के जिड़े जिला में
सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल नदियों के किनारे स्थित

सिंधु घाटी प्रमुख स्थल
नदियों के किनारे स्थित
लोथल
भोगवा नदी
हड़प्पा
रावी नदी
मोहनजोदड़ो
सिंधु नदी
चन्हूदड़ों
सिंधु नदी
कालीबंगा
घग्घर नदी
रोपड़
सतलज नदी
बनवाली
सरस्वती नदी
  • इस सभ्यता को सिंधु घाटी की सभ्यता का नाम मार्शल ने दिया लेकिन वर्तमान में इस सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता के नाम से जाना जाता है
  • हड़प्पा सभ्यता मात्री प्रधान तथा नगरीय सभ्यता थी साथ ही ताम्र पाषाण या कांस्य युगीन सभ्यता भी कहा गया है
  • पिगट महोदयका मानना है कि संभवतः इस सभ्यता की दो राजधानियां थी उत्तर में हड़प्पा दक्षिण में मोहनजोदड़ो


सिंधु घाटी सभ्यता की उत्पत्ति ( EVOLUTION OF INDUS VALLEY CIVILIZATION)

  • सिंधु घाटी सभ्यता की उत्पत्ति के विषय में विद्वानों में मतभेद है एक तरफ सर जॉन मार्शल, वीलर आदि विद्वानों ने इस सभ्यता की उत्पत्ति मेसोपोटामिया की सुमेरियनसभ्यता से मानते हैं
  • इतना ही नहीं वीलर सिंधु घाटी सभ्यता को सुमेरियन सभ्यता का एक उपनिवेश बताया हैं
  • इसके विपरीत टी.एन. रामचंद्रन, के.एन. शास्त्री, पुसालकर, एस.आर.रावआदि विद्वानों ने सिंधु घाटी सभ्यता का निर्माण आर्य को ही मानते हैं जी. गार्डनर के अनुसार इस सभ्यता के निर्माता सुमेरियन थे

  • मोहनजोदड़ो के निवासी अधिकांशत भूमध्यसागरीय थे।
  • श्री राम प्रसाद चंद्रा के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता के निर्माता व्यापारी वर्ग थे।
  • डॉक्टर विलर के अनुसार इस सभ्यता के निर्माता द्रविड़ जाति के लोग थे।

सिंधु घाटी सभ्यता एवं वैदिक घाटी सभ्यता में अंतर

  • वैदिक आर्य की सभ्यता ग्रामीण एवं कृषि प्रधान थी जबकि सिंधु घाटी सभ्यता नगरीय तथा व्यापार प्रधान थी आर्यों के मकान घास फूस की सहायता से बनाए जाते थे मगर सिंधु घाटी सभ्यता के लोग इसके लिए पक्की ईंटों का प्रयोग करते थे
  • वैदिक आर्यलोहे के ज्ञान से परिचित थे जबकि इसके विपरीत सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों को लोहे का ज्ञान नहीं था और वह पाषाण तथा कांस्ये के उपकरणों का प्रयोग करते थे।
  • वैदिक आर्य इंद्र,वरुण आदि देवताओं के उपासक थे तथा लिंग पूजा तथा मूर्ति पूजा के विरोधी थे जबकि सिंधु घाटी सभ्यता के लोग माता देवी तथा शिव के उपासक थे एवं मूर्ति पूजा के उपासक थे
  • आर्यों के प्रिय पशु अश्वत्था जिसकी सहायता से वे युद्ध जीते थे जबकि सिंधु घाटी सभ्यता के लोग अश्व से परिचित नहीं थे यह बाघ तथा हाथी से परिचित थे इसके विपरीत वैदिक आर्य को इनका ज्ञान नहीं था
  • सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों के पास अपनी एक लिपि थी जबकि आर्य लिपि से परिचित नहीं थे।
  • विद्वानों के अनुसार सिंधु घाटी की लिपि भाव चित्रात्मक लिपि थी।
  • सिंधु घाटी समाज वर्ण आदि में विभाजित ना होकर संपत व्यवसाय के आधार पर चार वर्गों में विभाजित था

1.  विद्वान
2.  योद्धा एवं प्रशासनिक अधिकारी
3.  व्यवसाई
4.  श्रमजीवी
  • सिंधु वासियों का मुख्य आहार गेहूं था यद्यपि वह फल मांस इत्यादि भी खाते थे
  • संभवतः सूती एवं ऊनी कपड़ों का प्रचलन था दर्पण कास्या के अंडाकार होते थे एवं कंघे हाथी दांत के बनाए जाते थे।
  • भ्रष्ट मोम विधि द्वारा सिंधु घाटी के लोग मूर्तियों का निर्माण करते थे
  • पशुओं में कूबड़ वाला बैल तथा कबूतर पूजे जाते थे वृक्षों में पीपल अधिक महत्व का था वहां से स्वास्तिक एवं पहिए के चिन्ह मिले हैं।

सिंधु घाटी सभ्यता के लोग मृतकों का तीन प्रकार से अंतिम संस्कार करते थे
1.  पूर्ण समाधि
2.  आंशिक समाधि
3.  दाह कर्म  विधि सर्वाधिक प्रचलित थी
  • मोहनजोदड़ो तथा लोथल दोनों को मृतकों का टीला कहा जाता है
  • कालीबंगा को ब्लैक बैंगल्स कहा जाता है उस समय पीपल को अश्व रथ कहा जाता था।

सिंधु घाटी सभ्यता की तिथि
·        मार्शल 3250 से 2750 ई० पूर्व तक
·        धर्मपाल अग्रवाल 2300 से 1750 ई० पूर्व तक
·        माके 2800 से 2500 ई० पूर्व तक
·        वीलर एवं प्रोफेसर संकलिया 2500 से 1500 ई० पूर्व तक इन्हीं का मत सर्वमान्य है।

सिंधु घाटी सभ्यता के पुरातात्विक वस्तुओं और प्राप्ति स्थान

सिंधु घाटी सभ्यता
पुरातात्विक वस्तुओं
हड़प्पा
कब्र गाह
अन्य भंडार
प्रसाधन मंजूषा
यागी की मूर्ति
श्रमिक आवास
उंट के कंकाल
मोहनजोदड़ो
दाढ़ी वाले पुरुष की मूर्ति
कांस्य नर्तकी
पीपल के दो डालों के बीच देवता के चित्र
तांबे का ढेर
स्नानागार
तांबे का बैल
सर्वेक्षण के लिए सीपी का यंत्र
चांदी के कलश से लाल कपड़ा
चन्हूदड़ों
मनके बनाने वाला कारखाना
पीतल का बत्तख
खिलौना गाड़ी
बणवाली
खिलौने का हल
कोटदीजी
पत्थर के औजार
कालीबंगा
हवन कुंड
अलंकृत ईटों का फर्श
जूते हुए खेत
लोथल
गोदी(नाव)
सीपी का यंत्र
तांबे की मोहर
गौरेला
मृणमूर्ती
तांबे का पक्षी
खरगोश
मिट्टी के नाव का खिलौना
बेदी से पशु की जली हुई हड्डी
लोथल एवं रंगपूर
घोड़े की मृणमुर्ती
धान कि भुसी
  • सिंधु घाटी से खुदाई में एक तराजू तथा बाट भी प्राप्त हुआ है इसमें सबसे छोटा बाट 13.65gm का है।
  • स्नानागार में पानी के बाहर कथा रिसाव को रोकने के लिए बिट्टूमिनस का लेप लगाया जाता था।
  • चन्हूदड़ों एक मात्र केन्द्र है जहाँ कब्रगाह का अस्तित्व नहीं है।
  • कपास का उत्पादन सबसे पहले सिंधु क्षेत्र में ही हुआ इसलिए यूनान के लोग उसे सिंडन कहते थे।
  • मेहुलासिंधु घाटी सभ्यता को दिया गया प्राचीन नाम है।
  • सिंधु घाटी सभ्यता की मोहर टेराकोटाके बने हुए थे।
  • मोहनजोदड़ो से प्राप्त पशुपति मोहर योगी की मुद्रा में बैठे हुए व्यक्ति के बगल में चार पशु चीता, गैंडा, भैंसा और हाथीके चित्र अंकित है।

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