उत्तर कालीन मुगल शासन का इतिहास

उत्तर कालीन मुगल शासन का इतिहास


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उत्तर कालीन मुगल शासन का इतिहास


उत्तर कालीन मुगल शासन का इतिहास

   
  • 1707 में मुगल शासक औरंगजेबकी मृत्यु हो गई उसके उपरांत उसका पुत्र मुअज्जम लाहौर के उत्तर में स्थित शाहदौलानामक पुल पर बहादुरशाह के नाम से अपने को सम्राट घोषित किया।
  • उत्तराधिकारी की लड़ाई में इसने जाऊजनामक स्थान पर आजमशाह को मार डाला तथा कामबक्स को हैदराबादके समीप पराजित किया।
  • इसने 1712 तक शासन किया इसी वर्ष इसकी मृत्यु हो गई बहादुर शाह को साहेब-ए-बेखबर भी कहा जाता था।
  • बहादुर शाह के मरने के बाद जहाँदारशाह जुल्फीकार खाँ की सहायता से गद्दी प्राप्त हुई यह एक आयोग्य एवं विलासी शासक था।
  • इसने अपने शासन के कार्यों में लाल कुमारी नाम की वैश्या को हस्तक्षेप करने का अधिकार दे दिया था। इसके समय सारी सत्ता जुल्फीकार खाँ के हाथ में रही अजीम उस शान के पुत्र फर्रूखसियर ने परिस्थिति का लाभ उठाया तथा सैयद बंधुओं की सहायता से फरवरी 1713 को इसकी हत्या कर दी।
  • जहाँदारशाह मुगल वंश का प्रथम अयोग्य शासक था इसे लंपट मूर्ख भी कहा जाता था।
  • जहाँदारशाह ने जयसिंह को मिर्जा राजा की पदवी दी।

उत्तर कालीन मुगल शासन का इतिहास
फर्रूखसियर 1713 में गद्दी पर बैठा इसके शासनकाल में वास्तविक सत्ता वजीर अब्दुल्ला खाँ तथा मीर वक्सी हुसैन अली खाँ के हाथों में रही।
फर्रूखसियर ने अपने शासन काल में मारवाड़ के राजा अजीत सिंह को परास्त किया नेतृत्व में मुगल सेना ने सिख नेता बंदा बहादुर को कैद कर लिया तथा बाद में उसकी हत्या कर दी गई सैयद बंधुओं ने 18 अप्रैल 1719 को सम्राट फर्रूखसियर की गला दबाकर हत्या कर दी इसे मुगल वंश का घृणित कायर कहा गया है।
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रफी-उद-दर्जात ( फरवरी 1719 से जून 1719)
फर्रूखसियर की हत्या के बाद रफी-उद-दर्जात गद्दी पर बैठा लेकिन बीमारी के कारण सैयद बंधुओं ने इसे भी गद्दी से उतार कर रफी-उद-दौला को शासक बनाया लेकिन इसका भी कार्यकाल बहुत छोटा रहा रफी-उद-दौला ने शाहजहाँ द्वितीय की उपाधि धारण की।
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मुहम्मदशाह:- रफी उद दौला के मृत्यु के उपरांत सैयद बंधुओं ने रोशन अख्तर को मुहम्मद शाह के नाम से 28 सितंबर 1719 को दिल्ली की गद्दी पर बैठाया प्रशासन के प्रति गैर जिम्मेवार तथा सुरा सुंदरियों के प्रति रुझान के कारण इसे रंगीला बादशाह भी कहा गया है।
इसने सैयद बंधुओं को परास्त कर उनकी हत्या कर दी जिसमें इसका सहयोगी निजाम-उल-मुल्क था। बाद में निजाम-उल-मुल्क ने हैदराबाद के सुबेदार एवं दक्कन के छ: सुबों को अपने अधिकार में ले लिया तथा अक्टूबर 1726 में स्वतंत्र शासक घोषित कर दिया।
मुहम्मद शाह के शासनकाल में मुगल साम्राज्य के दो अन्य राज्य अवध सआदत खां (बुरहानमुल्क) एवं बंगाल तथा बिहार मुर्शिद कुली खां के नेतृत्व में स्वतंत्र हो गया।
17 फरवरी 1739 को नादिरशाह ने मुहम्मद शाह को करनाल की लड़ाई में परास्त कर तख्ते ताऊत मयूर सिंहासन एवं कोह-ए-नूर हीरा को लूट लिया नादिरशाह को ईरान का नेपोलियन भी कहा जाता है।
नादिर शाह की 1747 में मृत्यु हो गई उसके उपरांत उसका सेनापति अहमदशाह अब्दाली अफगानिस्तान का शासक बना इसने पंजाब के सूबेदार शाहनवाज खान के निमंत्रण पर भारत पर आक्रमण किया परंतु बादशाह मुहम्मद शाह के पुत्र अहमद शाह ने 1748 में मच्छीवाडा के समीप मानपुर में इसे परास्त किया।
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अहमद शाह अब्दाली का आक्रमण:- 1747 में नादिर शाह की मृत्यु हो गई फिर एक नए सरदार अहमद शाह अब्दाली का उद्भव हुआ जो 1748 एसपी में शासक बना 1748 से 1767 के दौरान उसने भारत पर 7 आक्रमण किए। जिसमें 1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई 1767 ईस्वी में अब्दाली का अंतिम आक्रमण सिखों के विरुद्ध हुआ।
मुहम्मद शाह के उत्तराधिकारी
अहमद शाह ( 1748-54 ) :- 18 अप्रैल 1748 को अहमद शाह मुगल सम्राट बना इसने हिजड़ो के सरदार जावेद खाँको नवाब बहादुर की उपाधि प्रदान की।
इसने अपने शासनकाल में रोहिल्ला सरदारों के विद्रोह को दबाने के लिए मराठों की सहायता ली निजाम उल मुल्क के पुत्र गाजीउद्दीन फिरोज जंग ने अहमद शाह की आंखें निकलवा कर उसे अंधा करवा दिया तथा जहाँदार शाह के पुत्र आलमगीर द्वितीय को दिल्ली के राज सिंहासन पर बैठाया।
आलमगीर द्वितीय ( 1754 – 59 )
आलमगीर द्वितीय के समय वास्तविक सत्ता गाजी उद्दीन के पुत्र जबिता खाँ और पोते अब्दुल कादिर के हाथों में आ गई जबिता खाँ ने आलमगीर द्वितीय की हत्या कर डाली।
शाहआलम द्वितीय ( 1759 – 1806 ) इसका नाम अली गौहरभी था  यह बिना राजमुकुट का बादशाह था। 
इसने अवध के नवाब के यहां शरण पाई 1772 में इसे महादजी सिंधिया ने दिल्ली में प्रतिष्ठित किया।
शाहआलम द्वितीय अंग्रेजों मराठों तथा अपने अमीरों के हाथ की कठपुतली मात्र था।
इसने 1764 के बक्सर की लड़ाई में भाग लिया था जिसमें यह परास्त हुआ इसके ही शासन काल में 1806 में अंग्रेजों ने दिल्ली पर कब्जा किया।
इसी के शासनकाल में 1761 में पानीपत का तृतीय युद्ध हुआ।
इसके पश्चात 1806 में अकबर द्वितीय मुगल बादशाह बना यह 1837 ईस्वी तक रहा
अकबर द्वितीय ने राजा राम मोहन रायको राजा की उपाधि दी थी।
तत्पश्चात अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर शासक बना 1857 ईसवी के विद्रोह में भाग लेने के कारण इसे रंगून निर्वासित कर दिया गया जहां 1862 में इसकी मृत्यु हो गई बहादुर शाह के कविता का उपनाम जफरथा फलत: इसे जफर की उपाधि प्रदान की गई थी।
मुगल वंश एवं उत्तर कालीन मुगल वंश के प्रमुख शासक

क्रम
मुग़ल शासक
शासनकाल
1
बाबर
1526 से 1530
2
हुमायूं
1530 से 1556
3
अकबर
1556 से 1605
4
जहाँगीर
1605 से 1627
5
शाहजहाँ
1627 से 1658
6
औरंगजेब
1658 से 1707
7
बहादुर शाह
1707 से 1712
8
जहाँदार शाह
1712 से 1713
9
फर्रूखसियर
1713 से 1719
10
मुहम्मद शाह
1719 से 1748
11
अहमद शाह
1748 से 1753
12
आलमगीर द्वितीय
1753 से 1758
13
शाह आलम द्वितीय
1758 से 1806
14
अकबर द्वितीय
1806 से 1837
15
बहादुर शाह जफर
1837 से 1857
मुगल वंश के महत्वपूर्ण शासकों के मकबरे
क्रम
मुगल शासक
शासकों के मकबरे
1
बाबर
काबुल (अफगानिस्तान)
2
हिमायू
पुरानी दिल्ली
3
अकबर
सिकंदरा (आगरा)
4
जहाँगीर
शाहदरा (लाहौर)
5
शाहजहाँ
आगरा
6
औरंगजेब
दौलताबाद या औरंगाबाद

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